इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिसर में नारेबाजी कर न्यायिक कार्यवाही बाधित करने पर सख्त रुख अपनाया

Oct 29, 2026 - 13:38
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिसर में नारेबाजी कर न्यायिक कार्यवाही बाधित करने पर सख्त रुख अपनाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परिसर में नारेबाजी कर न्यायिक कार्यवाही बाधित करने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने घटना में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान कर उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला उप्र बार काउंसिल को भेजने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी।

न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने देवेंद्र कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। सुनवाई के समय कोर्ट के बाहर कॉरिडोर में कुछ अधिवक्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे न्यायिक कार्यवाही बाधित हुई। कोर्ट ने इस आचरण को अनुचित और घोर अवमाननापूर्ण करार दिया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि दूरदराज से आने वाले गरीब वादकारी न्याय पाने की उम्मीद में हाईकोर्ट पहुंचते हैं। किसी अधिवक्ता को किसी न्यायालय से शिकायत होने पर भी दूसरे न्यायालयों के बाहर नारेबाजी करने, कार्यवाही बाधित करने या अदालत को डराने-धमकाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल को सीसीटीवी फुटेज हासिल कर संबंधित अधिवक्ताओं की पहचान करने और अगली सुनवाई तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया।

वकील से कथित दुर्व्यवहार के बाद भड़का विवाद
विवाद मंगलवार को न्यायमूर्ति अजय भनोट की अदालत में एक अधिवक्ता के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों के बाद बढ़ा। बार असोसिएशन ने आरोप लगाया था कि न्यायाधीश ने अधिवक्ता को फटकार लगाई, जेल भेजने की धमकी दी और पुलिस अधीक्षक से माफी मांगने को कहा। इसके बाद बुधवार को अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। बवाल के कारण मुख्य न्यायाधीश की अदालत में भी करीब एक घंटे तक कामकाज प्रभावित रहा। कोर्ट नंबर 55 में भी बुधवार को अधिवक्ताओं के शोर-शराबे से सुनवाई बाधित हुई। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान आनंद प्रकाश की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। कोर्ट के बाहर नारेबाजी के कारण कार्यवाही आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया। आवेदक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने परिस्थितियों को देखते हुए सुनवाई स्थगित करने की अपील की। न्यायालय ने कहा कि वादकारियों के हित में अदालत का सुचारु संचालन सुनिश्चित करना बार के सदस्यों की जिम्मेदारी है। इसके बाद मामले की सुनवाई पांच नवंबर तक स्थगित कर दी गई। कोर्ट ने आदेश की प्रति रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश भी दिया।