संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत, आशा भोसले नहीं रही

संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत, आशा भोसले नहीं रही
सूर्यप्रकाश दुबे
मुंबई ,अपनी आवाज़ से हर भावना को जीवंत कर देने वाली आशा भोसले जी का निधन देश के लिए एक ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने न केवल भारतीय सिनेमा को ऊंचाई दी, बल्कि विश्व पटल पर भारत का मान बढ़ाया।
आज संगीत खामोश है, लेकिन ‘आशा ताई’ की विरासत हमारे बीच सदा अमर रहेगी।
92 वर्ष की आयु में बॉलीवुड की मशहूर सिंगर आशा भोसले जी के निधन का समाचार दु:खद है। वे पिछले कुछ दिनो से बीमार चल रही थीं और उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में एडमिट कराया गया था. बताया जा रहा है कि मल्टिपल ऑर्गन फेलियर की वजह से उनका निधन हुआ है.
संगीत जगत की महान गायिका, स्वर की अमर धरोहर आशा भोसले जी के निधन की खबर बेहद दुखद और स्तब्ध करने वाली है।
उनकी मधुर आवाज़ ने पीढ़ियों को जोड़ा, अनगिनत गीतों के माध्यम से उन्होंने हर दिल को छुआ और संगीत को एक नई पहचान दी।
उनका जाना भारतीय संगीत के एक स्वर्णिम युग का अंत है। आज संगीत जगत ने अपनी एक अमूल्य धरोहर खो दी। स्वर कोकिला आशा भोसले जी की मधुर आवाज़ ने 7 दशकों तक हमारे दिलों पर राज किया और हमेशा राज करेगा ।
राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री समेत सभी राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर अपनी शोक संवेदना व्यक्त की है। कल शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
Ashok Dwivedi

