टेट की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक – कर्मचारी 13 अप्रैल को निकलेंगे मशाल जुलूस

हरदो2ई। अटेवा पेंशन बचाओ मंच के जिलाध्यक्ष डॉ. जैनुल खान की अध्यक्षता में सी.एस.एन. पी.जी. कॉलेज के सभागार में जिला पदाधिकारियों व सदस्यों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक के मुख्य अतिथि अटेवा/एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रदेश महामंत्री व राष्ट्रीय सचिव डॉ. नीरजपति त्रिपाठी उपस्थित रहे। बैठक का शुभारंभ प्रदेशीय सलाहकार ओमप्रकाश कनौजिया व लखनऊ मंडल अध्यक्ष डॉ. आशीष वर्मा ने पेंशन शहीद रामाशीष सिंह के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। बैठक का संचालन जिला महामंत्री सायुज्य मिश्रा ने किया।
मुख्य अतिथि विजय कुमार बंधु ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक साथियों पर सरकार द्वारा जबरन टेट की अनिवार्यता थोपना गैरजिम्मेदाराना है। उन्होंने कहा कि कोई भी कानून लागू होने के बाद आगे से प्रभावी होता है, पीछे से नहीं। इसलिए वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता समाप्त की जानी चाहिए। विशिष्ट अतिथि डॉ. नीरजपति त्रिपाठी ने कहा कि सरकार हर कानूनी और गैरकानूनी व्यवस्था का बोझ शिक्षकों पर डाल रही है। यदि पुनः परीक्षा की व्यवस्था लागू करनी है तो यह सभी के लिए समान होनी चाहिए। उन्होंने पुरानी पेंशन व्यवस्था को कर्मचारियों का अधिकार बताते हुए कहा कि यह बुढ़ापे का सम्मान है और इसे बहाल कराना ही होगा। जिलाध्यक्ष डॉ. जैनुल खान ने बताया कि 13 अप्रैल को अटेवा/एनएमओपीएस व अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासभा के तत्वावधान में प्रदेश सहित देश के सभी जिला मुख्यालयों पर टेट की अनिवार्यता के विरोध में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। जिला मंत्री डिंपल वर्मा ने वर्ष 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टेट की अनिवार्यता को काला कानून बताते हुए महिला शिक्षकों से मशाल जुलूस में शामिल होने की अपील की। टीचर सेल्फ केयर टीम के जिला संयोजक सरीफुद्दीन ने शिक्षक-कर्मचारियों से आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार गंगवार ने कहा कि एनपीएस शेयर बाजार आधारित व्यवस्था है, जिसमें कर्मचारियों का भविष्य सुरक्षित नहीं है, इसलिए सरकार को पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करनी चाहिए। शिक्षक महासभा के प्रदेश संगठन मंत्री राजवीर सिंह ने भी पुरानी पेंशन को सरकारी नौकरी की रीढ़ बताते हुए इसे पुनः लागू करने की मांग की। इस अवसर पर कुसुमलता वर्मा, सतीश चंद्र प्रजापति, बृजलाल वर्मा, मदनलाल, राजीव कुमार, सत्येंद्र विक्रम दिवाकर, विनीत मिश्रा, बेबी गौतम, सीमा सुमन, महेश प्रसाद, वीरेन्द्र कुमार राना, राकेश राजपूत, गौरीशंकर प्रजापति, रुद्र शुक्ला, अरविंद कुमार, जितेंद्र सिंह चौहान, शिशिर कुमार, सारिका सिंह, डॉ. नाजमीन कुरैशी, हेमलता गौतम, मंजू वर्मा, लियाकत अली सहित बड़ी संख्या में शिक्षक व कर्मचारी मौजूद रहे।
Sudhir Gangwar

