हाथरस में मिड-डे मील और दूध वितरण में बड़ा खेल: 194 स्कूलों की जांच में 18 विद्यालयों में मिली गंभीर खामियां -48 अधिकारियों की टीम ने किया निरीक्षण, 2 स्कूलों में नहीं बना एमडीएम, 10 स्कूलों में दूध वितरण बंद, कई जगह भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब

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हाथरस। जनपद में प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में संचालित मिड-डे मील (एमडीएम) और दूध वितरण योजना की हकीकत बुधवार को सामने आ गई। विकास अधिकारी के निर्देश पर गठित 48 अधिकारियों की टीम ने जिले के 194 विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। जांच में 18 विद्यालयों में गंभीर अनियमितताएं पकड़ी गईं। कहीं बच्चों को मिड-डे मील और दूध नहीं मिला तो कहीं भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई।

निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार प्रा०वि० नगला उदयसिंह और प्रा०वि० बासवित्ता में निरीक्षण के समय न तो मिड-डे मील वितरित किया गया और न ही बच्चों को दूध दिया गया। इसके अलावा 10 विद्यालयों में मिड-डे मील की गुणवत्ता खराब मिली, जबकि 10 विद्यालयों में दूध वितरण नहीं किया गया।
सबसे चिंताजनक स्थिति उन विद्यालयों में मिली जहां भोजन की गुणवत्ता खराब होने के साथ-साथ दूध वितरण भी नहीं किया गया। अधिकारियों ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए संबंधित विद्यालयों से जवाब तलब करने की तैयारी शुरू कर दी है।

इन विद्यालयों में मिली गड़बड़ियां :
एमडीएम और दूध दोनों नहीं मिला :

प्रा०वि० नगला उदयसिंह
प्रा०वि० बासवित्ता
एमडीएम की गुणवत्ता खराब
प्रा०वि० नगला मनी
उ०प्रा०वि० टुकसान
प्रा०वि० नवीपुर
उ०प्रा०वि० नवीपुर
प्रा०वि० हासिमपुर
प्रा०वि० सुसायत खुर्द
प्रा०वि० सुसायल कलां
प्रा०वि० नगला घना

दूध वितरण नहीं, साथ ही एमडीएम भी खराब :

प्रा०वि० सिचावली कदीम
प्रा०वि० खुटीपुरी जाटान
दूध वितरण नहीं किया गया
प्रा०वि० नगला चौबे
संवि०वि० मीतई
प्रा०वि० नगला माधौ
प्रा०वि० नगला भीका
प्रा०वि० नगला बाबू-2
प्रा०वि० कलुआ

बच्चों के पोषण पर उठे सवाल :

सरकार द्वारा बच्चों के पोषण स्तर को सुधारने के लिए मिड-डे मील और दूध वितरण योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन निरीक्षण में सामने आई लापरवाही ने व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। कई विद्यालयों में भोजन की गुणवत्ता खराब मिलने से बच्चों के स्वास्थ्य पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

जिम्मेदारों पर कार्रवाई की तैयारी :

अधिकारियों की रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। शिक्षा विभाग अब संबंधित प्रधानाध्यापकों, रसोइयों और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में जुट गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि बच्चों के भोजन और पोषण योजनाओं में लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Jitendra

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