हाथरस में दलित युवक की हत्या में पुलिस खाली हाथ, मृतक युवक की तस्वीर को लेकर सदर तहसील में परिजनों ने दिया सांकेतिक धरना, आरोपी घूम रहे बाहर, परिजनों ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप “ठाकुर हैं, तुम क्या कर लोगे…” — पीड़ित परिवार का आरोप, हत्या की धाराएं न जोड़ने पर उठे सवाल

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हाथरस। उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मृतक के परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि हत्या जैसे गंभीर मामले में अब तक न तो हत्या की धाराएं जोड़ी गई हैं और न ही नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। पीड़ित परिवार ने पुलिस अधिकारियों पर जातिगत उत्पीड़न और समझौते का दबाव बनाने का भी आरोप लगाया है। इसी क्रम में मंगलवार को मृतक के पारिवारिक लोग ने सदर तहसील में सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया जिसमें उन्होंने आरोपियों की गिरफ्तारी व एससह-एसटी एक्ट के तहत मुआवजे की मांग की है। इस दौरान बताया गया कि मामला थाना हाथरस क्षेत्र में दर्ज FIR संख्या 0119 दिनांक 25 मार्च 2026 से जुड़ा है। मृतक के पिता ओमवीर सिंह ने पुलिस अध्यक्ष और आयुक्त को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि उनके बेटे की हत्या हुई है, लेकिन एफआईआर में हत्या की धारा तक नहीं लगाई गई। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और डेथ सर्टिफिकेट प्रशासन को सौंपे जा चुके हैं, इसके बावजूद पुलिस कार्रवाई करने से बच रही है।
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि घटना में शामिल तीन आरोपियों — हर्षित नगर, अभी और डिम्मी — के नाम एफआईआर में शामिल नहीं किए गए हैं, जबकि परिवार का दावा है कि तीनों आरोपी जैतपुर निवासी हैं और घटना में सीधे तौर पर शामिल हैं।
मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब परिवार ने पुलिस पर जातिगत टिप्पणी करने का आरोप लगाया। परिजनों का कहना है कि वे अनुसूचित जाति से संबंध रखते हैं, जबकि आरोपी ठाकुर समाज से हैं। परिवार का आरोप है कि जब भी वे थाना प्रभारी और अन्य अधिकारियों के पास जाते हैं तो उन्हें “राजीनामा कर लो” कहकर दबाव बनाया जाता है। यहां तक कि कथित तौर पर पुलिसकर्मियों ने यह तक कह दिया कि “वह लोग ठाकुर हैं, तुम क्या कर लोगे।”
पीड़ित परिवार का कहना है कि वे रोजाना अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार उन्हें दो-तीन दिन का समय देकर टाल दिया जाता है। साथ ही धमकाने का भी आरोप लगाया गया है। परिवार ने आशंका जताई है कि कार्रवाई में देरी के कारण मामले के साक्ष्यों से छेड़छाड़ हो सकती है और न्याय प्रभावित हो सकता है।
ओमवीर सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि मामले में हत्या की धाराएं जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते न्याय नहीं मिला तो परिवार आंदोलन करने को मजबूर होगा।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर पुलिस कार्यप्रणाली और दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में क्या कदम उठाता है।

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