योगी सरकार में हाथरस के आरटीओ में दलालों का दबदबा कायम, बिना ‘सेटिंग’ के नहीं हो रहे जरूरी काम -डीएल से लेकर पंजीकरण तक दलालों की पकड़ -कार्यालय गेट पर सजी दलालों की दुकानें

योगी सरकार में हाथरस के आरटीओ में दलालों का दबदबा कायम, बिना ‘सेटिंग’ के नहीं हो रहे जरूरी काम
-डीएल से लेकर पंजीकरण तक दलालों की पकड़
-कार्यालय गेट पर सजी दलालों की दुकानें
-तमाम कोशिशों के बावजूद भी नहीं ख़त्म हो रहा आरटीओ में दलालों का राज
-दलालों के बिना नहीं हो पाता डीएल से लेकर वाहनों की फिटनेस और पंजीकरण का काम
उत्तम हिन्दुस्तान ब्यूरो हाथरस
हाथरस। (जितेन्द्र कुमार) उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले में स्थित क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में दलालों का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि बिना ‘सेटिंग’ के यहां छोटा से छोटा काम भी कराना आम आदमी के लिए मुश्किल साबित हो रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने से लेकर वाहन पंजीकरण, फिटनेस और परमिट तक—हर काम में दलालों की भूमिका प्रमुख बताई जा रही है।
बताया जाता है कि ऑनलाइन आवेदन के बावजूद आवेदकों को टेस्ट पास करने के लिए भी दलालों का सहारा लेना पड़ता है। इसके लिए हजारों रुपये तक की मांग की जाती है, जबकि पूरा काम 5 से 6 हजार रुपये में कराने की बात कही जाती है। जो लोग सीधे प्रक्रिया अपनाने की कोशिश करते हैं, उन्हें बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
आरटीओ कार्यालय के बाहर, खासकर मैंडू रोड पर, दलालों ने कुर्सी-मेज लगाकर अपनी ‘दुकानें’ सजा रखी हैं। ये लोग आने-जाने वाले लोगों को रोककर जल्द काम कराने का भरोसा देते हैं। इतना ही नहीं, कुछ दलाल तो कार्यालय के मुख्य गेट तक पहुंच चुके हैं और वहीं से अपने नेटवर्क के जरिए काम संचालित कर रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि रोजाना इसी गेट से आरटीओ प्रशासन, एआरटीओ, प्रवर्तन अधिकारी और अन्य कर्मचारी कार्यालय में प्रवेश करते हैं, लेकिन उन्हें बाहर सक्रिय दलाल नजर नहीं आते या फिर कोई कार्रवाई नहीं की जाती। आरोप है कि कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना यह व्यवस्था संभव नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आमजन को मजबूरी में दलालों का सहारा लेना पड़ रहा है, क्योंकि बिना इसके फाइलें आगे नहीं बढ़तीं।
यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जरूरत है कि उच्च अधिकारी मामले का संज्ञान लें, निष्पक्ष जांच कराएं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित हो
Jitendra

