जल ही जीवन, सेवा ही संकल्प: हाथरस में 101 पानी की टंकियों के लोकार्पण से बेजुबानों को मिलेगा राहत का सहारा -यह कार्यक्रम 2 मई 2026, शनिवार को प्रातः 9:30 बजे तालाब चौराहा पर होना हुआ तय

हाथरस। भीषण गर्मी में जब इंसान ही नहीं, बेजुबान पशु-पक्षी भी पानी के संकट से जूझते हैं, ऐसे समय में सेवा और करुणा का अनुपम उदाहरण पेश करते हुए विश्व हिन्दू परिषद, जनपद हाथरस द्वारा एक विशेष पहल की जा रही है। “जल है तो कल है, जीव सेवा ही ईश्वर सेवा है” तथा “सेवा ही संगठन का संकल्प” के भाव को आत्मसात करते हुए जिले में एक साथ 101 पानी की टंकियों का लोकार्पण किया जाएगा।
यह कार्यक्रम 2 मई 2026, शनिवार को प्रातः 9:30 बजे तालाब चौराहा, हाथरस में आयोजित किया जाएगा। आयोजन को लेकर तैयारियाँ पूरी कर ली गई हैं और इसे एक बड़े जनसेवा अभियान के रूप में देखा जा रहा है।
जिलाधिकारी करेंगे लोकार्पण, वरिष्ठ अधिकारी रहेंगे मौजूद :
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अतुल वत्स मौजूद रहेंगे। वहीं कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अभय प्रताप सिंह (प्रांत सह मंत्री, विश्व हिन्दू परिषद ब्रज प्रांत) अपने विचार रखेंगे।
विशिष्ट अतिथि के रूप में चिरंजीवी नाथ सिन्हा तथा विशेष उपस्थिति में पी. एन. दीक्षित शामिल रहेंगे।
सेवा और करुणा का संदेश :
पदाधिकारी प्रवीण खंडेलवाल का कहना है कि गर्मी के मौसम में जल संकट केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सबसे अधिक प्रभाव पशु-पक्षियों पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई है, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बेजुबान जीवों को सहज जल उपलब्ध हो सके।
101 पानी की टंकियों की स्थापना को एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक सेवा अभियान के रूप में देखा जा रहा है, जो समाज में जीव सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा।
समाजसेवा की दिशा में बड़ा कदम
यह आयोजन न केवल धार्मिक और सामाजिक भावनाओं से जुड़ा है, बल्कि पर्यावरण और जीव-जंतु संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों से भी इस अभियान में भाग लेने की अपील की गई है।
आयोजकों ने सभी नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे इस “पुण्य कार्य” में सहभागी बनकर इसे सफल बनाएं और गर्मी में प्यासे जीवों के लिए राहत का माध्यम बनें।
“जल है तो कल है” के संदेश के साथ हाथरस में यह आयोजन सेवा, संवेदना और संगठन शक्ति का उदाहरण बनने जा रहा है।
Jitendra

