श्री भयहरणनाथ महादेव और बकुलाही मैया का प्राचीन समृद्धशाली संक्षिप्त इतिहास* *

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*श्री भयहरणनाथ महादेव और बकुलाही मैया का प्राचीन समृद्धशाली संक्षिप्त इतिहास* *-समाज शेखर* पांडव कालीन श्री काल भैरव का प्राचीन स्थल बाबा भयहरणनाथ धाम और बकुलाही मैया (नदी) उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में स्थित अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरें हैं। धाम इसी नदी के तट पर स्थित है, इनका संबंध महाभारत काल से लेकर वर्तमान के पर्यावरणीय संरक्षण प्रयासों तक गहरा है। भयहरणनाथ धाम का प्राचीन इतिहास व महत्वपांडव युगीन संबंध: पौराणिक कथाओं के अनुसार, अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इस क्षेत्र (द्वैतवन) में शरण ली थी। माना जाता है कि भीम ने राक्षस बकासुर का वध करने के बाद अपने पापों के प्रायश्चित और आत्मविश्वास प्राप्ति के लिए यहाँ शिवलिंग की स्थापना की थी।नाम का अर्थ: भय को हरने वाले देवता होने के कारण इन्हें ‘भयहरणनाथ’ कहा जाता है। यह मंदिर कटरा गुलाब सिंह गांव में स्थित है और इसे पांडव कालीन पांच प्रमुख सिद्ध स्थानों में से एक माना जाता है। धार्मिक जीवंतता: यह धाम लगभग 10 एकड़ में फैला है जहाँ मुख्य शिव मंदिर के अलावा हनुमान, राधा-कृष्ण और माँ संतोषी के भी मंदिर हैं। बकुलाही नदी का इतिहासवेदों में उल्लेख: बकुलाही एक प्राचीन, वेद-वर्णित नदी है जिसका प्राचीन नाम बालकुनी’ (बालुकिनी) था, जिसका अर्थ ‘रेत वाली नदी’ है। वाल्मीकि रामायण: इस नदी का उल्लेख वाल्मीकि रामायण में भी मिलता है, जब भगवान राम के वनवास से लौटने की प्रतीक्षा में भरत व्याकुल थे। भौगोलिक स्वरूप: इसकी टेढ़ी-मेढ़ी धारा (बगुले की तरह) के कारण लोकभाषा अवधी में इसे ‘बकुलाही’ कहा जाने लगा। यह रायबरेली की भरतपुर झील से निकलती है और प्रतापगढ़ के दक्षिणांचल को हरा-भरा करते हुए सई नदी में मिल जाती है। वर्तमान स्थिति (2025-2026)धार्मिक पर्यटन का विकास: उत्तर प्रदेश सरकार ने इस धाम को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगभग 5 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हेतु प्रस्तावित की गई है। वर्तमान में यहाँ श्रद्धालुओं के लिए मूलभूत सुविधाएं जैसे पर्यटक सुविधा केंद्र, पुस्तकालय, श्री श्री रवि शंकर ज्ञान मन्दिर अभिलेखागार, प्रशासनिक परिसर, विश्राम गृह (बारादरी) और सुगम मार्ग उपलब्ध हैं। नदी पुनरोद्धार: बकुलाही नदी, जो पहले अतिक्रमण और गाद के कारण लुप्तप्राय हो गई थी, ‘बकुलाही पुनरोद्धार अभियान’ के जरिए फिर से जीवित हो उठी है। अब नदी में जल प्रवाह बेहतर हुआ है, जिससे आसपास के गांवों का जलस्तर भी सुधरा है।प्रशासनिक सतर्कता: हाल के समय में धाम की भूमि के सीमांकन और अवैध निर्माणों को हटाने के लिए स्थानीय प्रशासन और समितियों द्वारा सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं। धाम का प्रबन्धन भयहरणनाथ धाम क्षेत्रीय विकास संस्थान एवं सहयोग नगर पंचायत कटरा गुलाब सिंह प्रतापगढ़ तथा सुरक्षा पुलिस चौकी कटरा गुलाब सिंह व थाना- जेठवारा द्वारा होती है। आगामी 17 मई से 15 जून 2026 तक अधिक मास ( मलमास) का आयोजन भव्यता से होगा, भागवत कथा सहित विविध धार्मिक आयोजन होंगे। जिसमे क्षेत्र, समाज के साथ साथ सभी संबंधित सरकारी विभाग व संस्थाएँ अपनी जिम्मेदारी निभायेंगी।

Ashok Dwivedi

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