योगी सरकार में सुरक्षित नहीं है महिला, उद्यमी विधवा-दिव्यांग महिला ने लगाई न्याय की गुहार, पुलिस पर निष्क्रियता के आरोप, डीआईजी से शिकायत -कार्यालय में घुसकर पांच लाख की रंगदारी और जान से मारने की धमकी का आरोप -सीसीटीवी में कैद अवैध हथियारों का प्रदर्शन, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई

योगी सरकार में सुरक्षित नहीं है महिला, उद्यमी विधवा-दिव्यांग महिला ने लगाई न्याय की गुहार, पुलिस पर निष्क्रियता के आरोप, डीआईजी से शिकायत
-कार्यालय में घुसकर पांच लाख की रंगदारी और जान से मारने की धमकी का आरोप
उत्तम हिन्दुस्तान ब्यूरो हाथरस
हाथरस। जनपद के थाना हाथरस गेट क्षेत्र में दर्ज एक गंभीर प्रकरण में प्रभावी कार्रवाई न होने से परेशान एक 60 वर्षीय विधवा एवं दिव्यांग महिला ने उच्च अधिकारियों से न्याय और सुरक्षा की गुहार लगाई है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि अवैध उगाही, जान से मारने की धमकी और अवैध हथियारों के खुले प्रदर्शन के बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, औद्योगिक एस्टेट अलीगढ़ रोड निवासी निवेदिता मोहता ने बताया कि 8 अप्रैल 2026 को कुछ आरोपी उनके कार्यालय में जबरन घुस आए और गाली-गलौज करते हुए 5 लाख की उगाही की मांग की। विरोध करने पर आरोपियों ने उन्हें और उनके पुत्र को जान से मारने की धमकी दी। इस संबंध में थाना हाथरस गेट में एफआईआर दर्ज कराई गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
पीड़िता का कहना है कि घटना के दौरान आरोपियों ने अवैध हथियारों का खुलेआम प्रदर्शन किया, जिसका पूरा घटनाक्रम सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड है। इसके बावजूद न तो हथियार जब्त किए गए और न ही उनके लाइसेंस की जांच की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने हथियार लहराए, वे वैध लाइसेंसधारी भी नहीं थे।
मामले को और गंभीर बताते हुए पीड़िता ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों को अगले ही दिन धारा 151 के तहत एसडीएम न्यायालय से रिहा कर दिया, जिससे उनके हौसले और बढ़ गए हैं। रिहाई के बाद आरोपी लगातार उन्हें धमका रहे हैं, जिससे पूरा परिवार भयभीत है।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपियों के खिलाफ पूर्व में भी कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। उनके प्रतिष्ठान “स्पाइसी दावत” में करीब तीन वर्ष पहले एक युवती की हत्या का मामला भी सामने आया था, जिसमें अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। महिला ने आशंका जताई है कि उसके साथ किसी भी समय गंभीर घटना हो सकती है। उन्होंने अपने जीवन और सुरक्षा के अधिकार (अनुच्छेद 21) का हवाला देते हुए उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच, आरोपियों की गिरफ्तारी, हथियारों की जब्ती और उनके लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है।
साथ ही पीड़िता ने खुद और अपने पुत्र को तत्काल पुलिस सुरक्षा प्रदान करने तथा संबंधित थाना पुलिस की भूमिका की विभागीय जांच कराने की भी मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक उन्हें अंतरिम सुरक्षा मिलना अत्यंत आवश्यक है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़िता को कब तक न्याय मिल पाता है।
Jitendra

