खेत तक रास्ता न मिलने से परेशान किसान, गोरखपुर से लखनऊ तक लगाई गुहार

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खेत तक रास्ता न मिलने से परेशान किसान, गोरखपुर से लखनऊ तक लगाई गुहार

-जलभराव से जूझ रहा था किसान, समाधान के लिए दर-दर भटका

-शिकायतों के बाद भी नहीं मिला रास्ता, किसान ने जनता दरबार में उठाई आवाज

 

उत्तम हिन्दुस्तान ब्यूरो, हाथरस
हाथरस। ग्राम नगला मया निवासी किसान चन्द्रपाल सिंह अपने खेतों तक जाने के लिए रास्ता न मिलने की समस्या से लंबे समय से जूझ रहे हैं। कई बार स्थानीय स्तर पर शिकायत करने के बावजूद समाधान न मिलने पर किसान को अपनी समस्या लेकर उच्च स्तर तक जाना पड़ा।
किसान के अनुसार, उनके खेतों तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता चकरोड संख्या 124 है, जिस पर वर्षों से गाँव की नालियों का पानी बहाया जा रहा है। इसके चलते रास्ते पर जलभराव और कीचड़ की स्थिति बनी रहती है, जिससे खेतों तक पहुँचना बेहद कठिन हो गया है और खेती का कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
चन्द्रपाल सिंह का कहना है कि उन्होंने इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हाल ही में उनके खेत की मेड़ पर खड़े नीम के पेड़ों को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के उखाड़ दिया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ है।
किसान ने बताया कि वह रीढ़ की बीमारी से भी पीड़ित हैं, जिसके कारण खेत तक खाद, बीज और अन्य सामग्री ले जाना उनके लिए अत्यंत कठिन हो जाता है। इसके बावजूद मजबूरी में उन्हें खेती का कार्य जारी रखना पड़ रहा है।
समस्या के समाधान की उम्मीद में किसान ने 6 मार्च को गोरखपुर में आयोजित जनता दरबार में प्रार्थना पत्र दिया। इसके बाद 7 मार्च को लखनऊ में जनता दरबार में अपनी बात रखी तथा 8 अप्रैल को लखनऊ स्थित राजस्व विभाग, सचिवालय में भी आवेदन प्रस्तुत किया।
अब किसान समाधान की उम्मीद के साथ अपने गाँव लौट रहा है और उसे विश्वास है कि संबंधित अधिकारी उसकी समस्या पर शीघ्र ध्यान देंगे।

Jitendra

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