भगवान को छप्पन भोग नहीं, भक्त का प्रेम और भाव चाहिए : अशोक हरिदास

महाभारत युद्ध और द्रोपदी चीरहरण प्रसंग सुनकर भावविभोर हुए श्रद्धालु, कलयुग के पांच स्थानों का भी किया वर्णन

Aug 8, 2026 - 09:35
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उत्तम हिंदुस्तान ब्यूरो : बिजनौर

झालू। ग्राम धर्मपुर स्थित शंभू झारखंडी शिव मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास अशोक हरिदास महाराज ने श्रद्धालुओं को महाभारत युद्ध, द्रोपदी चीरहरण तथा भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन सुनाकर भावविभोर कर दिया।
कथा व्यास अशोक हरिदास महाराज ने महाभारत युद्ध के कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाभारत का युद्ध टाला जा सकता था, लेकिन अहंकार, अधर्म और हठ के कारण परिस्थितियां युद्ध तक पहुंच गईं। उन्होंने द्रोपदी चीरहरण का प्रसंग सुनाते हुए भगवान श्रीकृष्ण की लीला और भक्तों के प्रति उनकी करुणा का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि भगवान को छप्पन भोग नहीं, बल्कि भक्त का प्रेम और शुद्ध भाव चाहिए। विदुरानी के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण जब विदुर के घर पहुंचे तो प्रेम और भाव-विभोरता में विदुरानी केले के गूदे की जगह छिलके देने लगीं। भगवान ने भी उन्हें प्रेमपूर्वक स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि भगवान भोजन की वस्तु नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपे भक्त के भाव को देखते हैं।
उन्होंने कहा कि सुदामा के तंदुल हों या विदुरानी के केले के छिलके, भगवान ने हमेशा प्रेम से अर्पित की गई वस्तु को स्वीकार किया है। यदि भक्त का भाव शुद्ध है तो उसकी साधारण दाल-रोटी भी भगवान के लिए छप्पन भोग के समान है।
 
कलयुग के पांच स्थान बताए

कथा के दौरान व्यास अशोक हरिदास महाराज ने भागवत पुराण में वर्णित कलयुग के पांच प्रमुख स्थानों का भी विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित ने कलयुग को प्रारंभ में चार स्थान दिए थे, जिनमें द्यूत (जुआ), पान (मदिरापान), स्त्री-संग/व्यभिचार और सूना (हिंसा) शामिल थे। बाद में कलयुग के आग्रह पर उसे पांचवां स्थान सुवर्ण अर्थात सोना प्रदान किया गया।
उन्होंने कहा कि जुआ और सट्टे के स्थान पर असत्य तथा छल का प्रभाव बढ़ता है। मदिरापान और नशीले पदार्थों के सेवन से विवेक पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। व्यभिचार और चरित्रहीन आचरण से काम तथा आसक्ति बढ़ती है। हिंसा और मांसाहार से क्रूरता तथा वैर की भावना उत्पन्न होती है, जबकि अनुचित तरीके से अर्जित धन लोभ और ईर्ष्या को बढ़ावा देता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि मन और बुद्धि को पवित्र रखने के लिए इन विकारों से दूर रहकर भगवान का स्मरण और सदाचार का मार्ग अपनाएं।
कथा के दौरान डॉ धर्मवीर सिंह, सूरज सिंह, लटूर सिंह, नरेश, प्रमिला, सुनीता देवी, शोभा, मुन्नी, राजेश्वरी, मोनी, सोनी, प्रिंस, प्रवेश, सुमन, उषा, सोनम, ज्योति, मौसम, बबली, पूनम, बीना, अनिता, महावीर, तुषार, नरपाल, महेंद्र, रामेंद्र, ओमपाल, यशपाल, योगेंद्र, वीरेंद्र, दीपक, अरविंद, कुलवीर, दिलावर, जोगेंद्र सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। कथा स्थल भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंजता रहा।

@akag उत्तम हिंदुस्तान जिला ब्यूरो चीफ बिजनौर