सच्ची श्रद्धा और भाव से ही मिलती है भगवान की कृपा : अशोक हरिदास महाराज
श्रीकृष्ण जन्म और वामन अवतार प्रसंग ने बांधा श्रद्धालुओं को, भजनों पर झूमे भक्त
उत्तम हिंदुस्तान ब्यूरो : बिजनौर
झालू। ग्राम धर्मपुरा स्थित स्वयंभू शंभू झारखंडी शिव मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास अशोक हरिदास महाराज ने भगवान की भक्ति, राजा दक्ष-माता सती प्रसंग, वामन अवतार और श्रीकृष्ण जन्म की कथा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान धार्मिक प्रसंगों और भजनों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान को पाने के लिए दिखावे की नहीं, बल्कि मन में सच्ची श्रद्धा और भक्ति का भाव होना आवश्यक है। निष्कपट मन से की गई आराधना भगवान तक अवश्य पहुंचती है। उन्होंने कहा कि परमात्मा कण-कण में विद्यमान हैं और जिस भक्त पर उनकी कृपा हो जाती है, उसका कोई अहित नहीं कर सकता। उन्होंने श्रद्धालुओं से अहंकार का त्याग कर भगवान के प्रति विश्वास और श्रद्धा बनाए रखने का आह्वान किया।
राजा दक्ष और माता सती के प्रसंग का वर्णन करते हुए उन्होंने अहंकार के दुष्परिणामों पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही वामन अवतार की कथा सुनाते हुए भगवान विष्णु की लीला और राजा बलि की भक्ति एवं दानशीलता का वर्णन किया। कथा व्यास ने कहा कि भगवान अपने भक्तों की परीक्षा लेते हैं, लेकिन सच्चे भाव से उनकी शरण में जाने वाले भक्तों पर सदैव कृपा बनी रहती है।
श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का वर्णन होते ही कथा पंडाल जयकारों से गूंज उठा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की झांकी प्रस्तुत की गई तो श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। महिलाओं ने मंगल गीत गाए और श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारे लगाए। पूरे मंदिर परिसर में देर तक भक्तिमय वातावरण बना रहा।
कथा में डॉ. धर्मवीर सिंह, सूरज सिंह, ग्राम प्रधान शौवीर सिंह, नरेश, जोगेंद्र, दीपक, महावीर, विजयपाल, वीरेंद्र, अरविंद, यशपाल, शोभा, बबली, सर्वेश, विदुषी, संगीता, उषा, सुमन, पूनम, माया, परमीला, लवली, बुलबुल, पिंकी, दृष्टि, सुनीता समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।