सत्ता में आते ही बदल जाता है सुर ? छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के दोहरे रवैये पर उठे सवाल

Aug 11, 2026 - 19:14
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सत्ता में आते ही बदल जाता है सुर ? छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के दोहरे रवैये पर उठे सवाल

सत्ता में आते ही बदल जाता है सुर ? छात्रों के मुद्दे पर कांग्रेस और भाजपा के दोहरे रवैये पर उठे सवाल

जंतर-मंतर से झारखंड तक छात्रों के आंदोलन ने फिर खड़ा किया बड़ा राजनीतिक सवाल

विपक्ष में रहते हुए लाठीचार्ज का विरोध, सत्ता में आते ही वही कार्रवाई क्यों ?

कैथल (कृष्ण प्रजापति): नई दिल्ली से लेकर झारखंड तक छात्रों के आंदोलनों ने एक बार फिर देश की राजनीति के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या छात्रों के अधिकार और उनके भविष्य का मुद्दा राजनीतिक दलों के लिए सत्ता के हिसाब से बदल जाता है ?
दिल्ली में जब छात्रों के आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई हुई थी, तब विपक्ष में बैठी कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों ने छात्रों के समर्थन में आवाज उठाई थी और सरकार पर सवाल खड़े किए थे। अब झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों के आंदोलन के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, पानी की बौछार और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें सामने आई हैं।
दिलचस्प बात यह है कि झारखंड में कांग्रेस सत्ता का हिस्सा है, जबकि भाजपा विपक्ष में है। ऐसे में राजनीतिक समीकरण भी बदल गए हैं। अब भाजपा छात्रों के समर्थन में सरकार को घेर रही है, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से आंदोलन को कानून-व्यवस्था के नजरिए से देखा जा रहा है।
यही स्थिति आम जनता के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करती है कि क्या लाठीचार्ज विपक्ष में रहते हुए गलत और सत्ता में आने के बाद सही हो जाता है ?
राजनीतिक दलों से सवाल यह भी है कि अगर छात्रों पर पुलिस कार्रवाई गलत है तो फिर पार्टी कोई भी हो, सरकार कोई भी हो, उसके खिलाफ समान आवाज क्यों नहीं उठनी चाहिए ? छात्रों का भविष्य किसी राजनीतिक दल की सत्ता या विपक्ष की स्थिति पर निर्भर नहीं होना चाहिए।
दरअसल, यही राजनीति का सबसे बड़ा विरोधाभास दिखाई देता है। विपक्ष में रहते हुए वही मुद्दा लोकतंत्र और छात्रों के अधिकार का सवाल बन जाता है, लेकिन सत्ता में पहुंचने के बाद वही आंदोलन कानून-व्यवस्था की चुनौती नजर आने लगता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि राजनीति में सिद्धांत स्थायी हैं या सत्ता के साथ उनका रंग बदल जाता है ?
जनता के बीच अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि कोई भी पार्टी हो, भाजपा, कांग्रेस या कोई अन्य, अगर छात्रों की मांग जायज है तो उनके साथ खड़ा होना चाहिए और अगर पुलिस कार्रवाई गलत है तो उसकी निष्पक्ष आलोचना होनी चाहिए।
कहने का मतलब साफ है कि सत्ता चाहे किसी की भी हो, छात्रों की आवाज पर लाठी नहीं, संवाद होना चाहिए। क्योंकि छात्र किसी पार्टी के नहीं, देश के भविष्य हैं।
और शायद यही लोकतंत्र की असली परीक्षा भी है, विपक्ष में रहते हुए नहीं, बल्कि सत्ता में रहते हुए अपने सिद्धांतों पर कायम रहना।